समीक्षा १५
एक पुस्तक। "साँसों के साथ मेरे अनुप्रयोग"
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मेरी नजर में
रचना प्रकाशन से प्रकाशित, लेखक डॉ शब्बीर दुबे। प्रकाशन वर्ष २०१९, संस्करण प्रथम। एक ही जिल्द में, सीधी पढ़िये हिन्दी में और १८० डिग्री वर्टीकल घुमाइये तो अंग्रेजी में। दोनो भाषा में स्वयं दुबेजी ने लिखी। पृष्ठ संख्या ३२+ 32. विमोचन दिनांक ४/११/२०१९
पुस्तक में उनकी स्वासों से संबंधित स्वानुभूत अभिक्रियाओं का और उनके प्रायोगिक परिणामों की समन्वित सारगर्भित प्रस्तुति है।
इसकी प्रस्तावना लिखने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ। यथा....
प्रस्तावना
सांस आती है सांस जाती है यह क्रम आजीवन चलता रहता है सिर्फ एक बार जाकर लौटती नहीं है और जीवन समाप्त हो जाता है। हम इस बात से बेखबर हैं कि जीवन और सांस के बीच एक शाश्वत अनुबंध है।
इस महत्व को जिसने जाना उसने जीवन को जाना। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं की सांसो के विषय में चिंतन स्वयमेव जीवन के विषय में चिंतन है। हमारे रोजमर्रा के जीवन में घट रही छोटी-बड़ी घटनाएं हमारे भीतर बाहर को प्रभावित करती है और से प्रभाव सांसों पर भी तुरंत पड़ते हैं। आश्चर्य की बात है कि प्रतिक्षण चल रही सांसो को जागृत होकर हमने कभी देखा ही नहीं।
डॉक्टर शब्बीर दुबे ने सांस के जुड़े तमाम पहलुओं पर चिंतन किया और इस परिप्रेक्ष्य में तथ्यों के आधार पर अध्ययन और मनन किया। स्वयं अपने जीवन में विभिन्न परीक्षण तथा सफल प्रयोग किए हैं जिनका विवरण इस कृति में उल्लिखित है। इसलिए यह कृति अनूठी हो गई है।
सांस हमारे प्राण को पुष्ट करती है। इससे संबंधित सिद्धांतों के आधार पर अपनी अंतर्यात्रा में श्री दुबे जी ने अपने अनुप्रयोगों में साक्षात अनुभव किया है, जिसे उन्होंने "सांसो से सांसों की ओर" सकारात्मक संज्ञा दी है।
हमारे मन, विचार, भावनाओं को तथा मानसिकता को सांसे कितना प्रभावित करती है तथा उन्हें कैसे नियंत्रित किया जाता है इसका उल्लेख आप इस कृति के माध्यम से जान पाएंगे। महात्मा बुद्ध, ओशो इत्यादि प्रबुद्ध पुरुषों ने जो बातें सांसों की बारे में कही है उनका अनुप्रयोग श्री दुबे जी की साधना का अहम हिस्सा रही है और इसी कारण यह कृति लोकोपयोगी सिद्ध होगी।
उनके अनुप्रयोग "शोध" प्रतीत होते हैं क्योंकि उन्होंने इसे शारीरिक, मानसिक, वैचारिक और आध्यात्मिक स्तर पर जांच परख कर परिणाम जन्य ने बनाया है।
अनुप्रयोगों में प्राणायाम, योगनिद्रा, नेति विपष्यना आदि विधाओं का सरलीकरण प्रयोग शामिल है। डॉक्टर शब्बीर दुबे जी पेशे से चिकित्सक होते हुए भी एक सफल साधक हैं। निश्चित रूप से इनकी कृति आपके लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगी। ईश्वर से विनती है कि वे जीवन में उत्तरोत्तर लोकोपयोगी सृजन करते रहें।
रामनारायण सोनी
१५/१०/२०१९
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