काव्य की अन्तर्धाराएँ एक प्रयोग है।
यह समालोचना के सम्पूर्ण परिक्षेत्र में नूतन प्रयोग है। क्योंकि अधिकतर समीक्षाएँ या तो एक कवि, या एक काव्य/कृति, या एक प्रकार की रचनाओं पर आधारित होती हैं।
लेकिन "काव्य की अन्तर्धारा में कुछ अलग प्रयोग है।
१. इसमें २२ रचनाकारों की ४२ रचनाएँ सम्मिलित हैं जिनकी समीक्षाएँ की गई हैं। वस्तुतः यह कविताओं की समीक्षाओं का संकलन है।
२. इसमें चार पुस्तकों की संक्षिप्त समीक्षाएँ भी सम्मिलित हैं।
३. कविताओं का चुनाव कविताओं की भावात्मक अभिव्यक्ति और उनकी गुणवत्ता के आधार पर स्वयं ही किया गया है, इस हेतु किसी रचनाकार का न तो कोई अनुरोध था न ही किसी की रिकमण्डेशन ही प्राप्त हुई थी।
४. विभिन्न कविताएँ भिन्न-भिन्न विषयवस्तु और कथ्यों के आधार लिये हुए है इसलिये इसके क्रमवार पठन में भी नित्य नवीनता बनी रहती है।
५. समीक्षाएँ स्वतन्त्र रूप से लिखी गई है न ही उनकी सहमति/असहमति की आवश्यकता पड़ी।
६. अधिकतर समीक्षाओं को फेसबुक पर पाठकों का स्नेह और भरपूर समर्थन तथा प्रोत्साहन मिला।
अपने प्रिय पाठकों को सादर सस्नेह समर्पित।
रामनारायण सोनी
No comments:
Post a Comment